रक्षा मंत्री को अब फ्रांस जाने की क्या जरूरत पड़ गई?

रक्षा मंत्री को अब फ्रांस जाने की क्या जरूरत पड़ गई?
राफ़ेल डील मे मोदी और अनिल अंबानी के अलावा कोई फ्रांस नही गया था, तो अब क्यों?

आपको बता दें की राफ़ेल सौदा जो की यूपीए की सरकार ने 126 राफ़ेल विमान 526 करोड़ रुपए मे खरीदे थे और कांट्रॅक्ट मे हिन्दुस्तान एरोनॉटिकल लिमिटेड को कांट्रॅक्ट दिया गया था,
जिसे मोदी जी ने स्वयं फ्रांस जाकर इस सौदे को बदल कर 36 126 विमान की जगह 36 विमान कर दिया जी दौरान अनिल अंबानी जी भी साथ थे!
इस मामले मे कॉंग्रेस का कहना है क़ी राफ़ेल मे बहुत बड़ा घोटाला हुआ है,
जिसके लिए कॉंग्रेस ने इस मामले मे जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई!

अब एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसमे ये बात साबित हो गयी है कि राफेल सौदे के लिए समझौते को अनिल अम्बानी के साथ अनिवार्य किया गया था। इस बात का दावा फ्रांस की वेबसाइट “मीडियापार्ट” ने किया है।

इस वेबसाइट ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद से बात करने के बाद ये खुलासा काइया था कि अनिल अम्बानी को भारतीय पार्टनर के तौर पर शामिल करने का फैसला भारतीय सरकार द्वारा किया गया था।

एक और नए खुलासे के बाद अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, ख़ास कर ऐसे समय जब कई राज्यों में चुनावों की घोषणा हो गयी हैं।

राफेल विमान सौदे पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के सनसनीखेज दावे के बाद भारत में सियासी घमासान जारी है। राफेल सौदे में ‘ऑफसेट साझेदार’ के संदर्भ में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के कथित बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष लगातार हमला बोल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह ‘स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का मामला’ है।

राफेल विमान सौदे पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के सनसनीखेज दावे के बाद भारत में सियासी घमासान जारी है। राफेल सौदे में ‘ऑफसेट साझेदार’ के संदर्भ में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के कथित बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष लगातार हमला बोल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह ‘स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का मामला’ है। जिसके लिए उनकोने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखाया था, सुप्रीम कोर्ट ने राफ़ेल डील पर मोदी सरकार को विस्तार से समझाने का आदेश दिया है!

राफेल सौदे को लेकर मोदी सरकार के फैसले पर उठाए जा रहे सवालों के बीच देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से बिना नोटिस जारी किए इसकी खरीद के फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया का ब्योरा मांगा है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मांगी गई जानकारी जेट विमानों की कीमत या उपयुक्तता से संबंधित नहीं है। कोर्ट ने ने कहा कि सूचना को सीलबंद कवर में पेश किया जाना चाहिए और यह सुनवाई की अगली तारीख यानी 29 अक्टूबर तक अदालत में पहुंचनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोेगोई की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को सरकार को इस सौदे को अंतिम रूप देेने वाली निर्णय प्रकिया का पूरा ब्योरा एक सीलबंद कवर में देने को कहा है। खंडपीठ ने कहा कि वह इस समय केन्द्र सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं कर रही है।

इस याचिका में फ्रांस की कंपनी दसाल्ट द्वारा रिलायंस को दिए गए ठेके की जानकारी भी मांगी गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अब 29 अक्टूबर को करेगा। गौरतलब है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर कांग्रेस भारी अनियमितताओं का आरोप लगा रही है।

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